अल नीनो का बढ़ता खतरा: 2027 तक मौसम, खेती और समुद्री जीवन पर पड़ सकता है बड़ा असर,

दुनियाभर में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते असर के बीच अल नीनो (El Niño) एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि आने वाले वर्षों में अल नीनो की स्थिति मजबूत बनी रहती है, तो 2027 तक इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है। इससे कई देशों में तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है, बारिश का पैटर्न पूरी तरह बदल सकता है और कई क्षेत्रों में सूखे जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है।
भारत जैसे कृषि प्रधान देश में अल नीनो का असर सबसे अधिक मानसून पर पड़ता है। कमजोर या असमान मानसून के कारण फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है, जिससे किसानों की आय पर असर पड़ेगा और खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। जलाशयों का जलस्तर घटने, पेयजल संकट और बिजली उत्पादन पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि समुद्र के तापमान में वृद्धि से समुद्री जैव विविधता प्रभावित हो सकती है। मछलियों की संख्या और उनके प्रवास के पैटर्न में बदलाव आने से मत्स्य उद्योग को भी भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके साथ ही जंगलों में आग, हीटवेव और चरम मौसम की घटनाओं में वृद्धि की आशंका भी जताई जा रही है।
हालांकि वैज्ञानिक स्पष्ट करते हैं कि किसी भी वर्ष के सटीक प्रभाव का अनुमान कई अन्य जलवायु कारकों पर भी निर्भर करता है। इसलिए अल नीनो को लेकर लगातार निगरानी और समय-समय पर जारी होने वाले आधिकारिक मौसम पूर्वानुमानों पर ध्यान देना आवश्यक है।



