Farah Khan Takes Another Dig At Deepika Padukone's 8 Hour Work Demand Amid Kalki 2 Exit; Says, "She Doesn't Have Time"

Sep 27, 2025, 01:36 PM
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Posted By Gaandiv
Farah Khan Takes Another Dig At Deepika Padukone's 8 Hour Work Demand Amid Kalki 2 Exit; Says, "She Doesn't Have Time"
Farah Khan touches Deepika Padukone's 8 hour work demand debate playfully in her recent vlog. Scroll down to read more Farah Khan, in her latest YouTube vlog, took a playful dig at Deepika Padukone's recent demand for an 8-hour work shift. This comes just days after her exit from the Kalki 2898 AD sequel. Recently, Deepika Padukone made headlines when the makers of Kalki 2898 AD announced her departure from the project. This isn't the first time her exit from a film has grabbed attention -- earlier, she had made waves by leaving Sandeep Reddy Vanga's Spirit over demands for an eight-hour workday and higher pay. In her new vlog, Farah Khan and her cook Dilip visited Rohit Saraf's house. During the visit, Rohit mentioned that it was the first time his mother appeared on camera and that they had made her wait a year to shoot. Jokingly, Farah responded, "Haan itna time toh Deepika Padukone ne nahi lagaya mujhe haan bolne mein." Later, Dilip asked Farah when they would visit the Om Shanti Om star's house. To this, Farah replied that she now only shoots for 8 hours and doesn't have time to be part of their vlog. This isn't the first time Farah Khan has commented on Deepika Padukone's 8-hour work demand. In an earlier vlog, while visiting Radhikka Madan's house, they discussed her first audition for Meri Aashiqui Tumse Hi. During the conversation, the topic of shift hours came up. Radhikka shared, "I felt very safe the moment the camera switched on." She added that she was sure she wouldn't be cast after the audition, but to her surprise, she was shooting for her next project within two days. Farah then asked her about having an 8-hour shift. Radhikka replied, "56 hours non-stop or 48 hours non-stop." The filmmaker, who has worked with Deepika in Happy New Year and Om Shanti Om, hinted that she doesn't support such a rigid 8-hour work schedule either. She concluded with a playful remark, "Aise tapke hi toh sona banta hai," implying that sometimes, pushing limits is what makes great work happen. After welcoming her daughter, Dua, in late 2024, actress Deepika Padukone allegedly requested an 8-hour workday, igniting widespread discussion within the Indian film industry. This demand was reportedly a significant reason behind her prominent departures from two major projects in 2025: Sandeep Reddy Vanga's Spirit and the sequel to Kalki 2898 AD. For more news and updates from the entertainment world, stay tuned to Bollywood Bubble.
सोनम ने किया प्रोटेस्ट ख़त्म, अभिजीत ने कहा धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के अलावा कुछ नहीं
सोनम ने किया प्रोटेस्ट ख़त्म, अभिजीत ने कहा धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के अलावा कुछ नहीं
दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के प्रदर्शन में आज हालात थोड़े बदले हुए दिखे, लेकिन आंदोलन की धार अभी भी तेज बनी हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक पर सख्त कानून, तेज़ कार्रवाई और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए नया बिल लाने का आश्वासन दिया है, जिसके बाद माहौल में कुछ उम्मीद तो आई है, लेकिन प्रदर्शन पूरी तरह थमा नहीं है।मोदी के ऐलान के बाद का माहौलप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में नीट और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं पर सख्त कानून, फास्ट ट्रैक कोर्ट और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की बात कही है। सरकार यह संकेत दे रही है कि आने वाले सत्र से पहले एक मजबूत बिल लाकर पेपर लीक पर कड़ी सजा और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।CJP से जुड़े कई छात्र और युवा इन घोषणाओं को पहली बड़ी जीत मान रहे हैं, लेकिन उनका कहना है कि केवल सजा बढ़ाने से बात पूरी नहीं होगी, सिस्टम में जवाबदेही तय करनी होगी। इसी सवाल पर प्रदर्शनकारियों और सरकार के बीच बातचीत की कोशिशें जारी हैं।सोनम वांगचुक ने अनशन तोड़ाजाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिन लंबा अनशन सरकार के आश्वासन के बाद खत्म कर दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक, सोनम वांगचुक का अनशन बीजेपी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में तुड़वाया गया, जहाँ उन्हें सरकार की ओर से सुधारों का भरोसा दिलाया गया।अनशन खत्म करने के बाद भी सोनम वांगचुक ने साफ कहा है कि वे और CJP के समर्थक परीक्षा प्रणाली में ईमानदार सुधार, पारदर्शिता और पेपर लीक पर कड़े कदमों की निगरानी करते रहेंगे। उनका संदेश यह है कि युवाओं की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई, यह सिर्फ एक चरण पूरा हुआ है।अभिजीत दिपके की सख्त मांगCJP के संस्थापक अभिजीत दिपके अब भी अपनी मूल मांग पर डटे हुए हैं कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए। उनका कहना है कि जब तक पेपर लीक और परीक्षा घोटालों की नैतिक जिम्मेदारी कोई नहीं लेता, सिर्फ कानून और बिल से भरोसा वापस नहीं आएगा।अभिजीत दिपके ने हाल ही में साफ शब्दों में कहा कि यदि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं लिया गया, तो आंदोलन आगे चलकर प्रधानमंत्री के इस्तीफे तक की मांग उठा सकता है। जंतर-मंतर पर दिए गए उनके संदेशों में यह भी कहा गया है कि विरोध तब ही खत्म होगा, जब शिक्षा मंत्री पद छोड़कर छात्रों के प्रति अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करेंगे।प्रमुख बिंदु (संक्षेप में)CJP का प्रदर्शन नीट और अन्य परीक्षाओं में पेपर लीक के खिलाफ जारी है, फोकस शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जिम्मेदारी पर है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून, फास्ट ट्रैक कोर्ट और परीक्षा सुधारों का आश्वासन दिया है।सोनम वांगचुक ने 26 दिन बाद अपना अनशन सरकारी भरोसे के बाद समाप्त किया, लेकिन आंदोलन के उद्देश्य से पीछे नहीं हटे हैं।अभिजीत दिपके अब भी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़े हुए हैं और चेतावनी दे रहे हैं कि मांग न मानने पर आंदोलन और तेज हो सकता है।
जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात के बाद सोनम वांगचुक ने तोड़ा अनशन, अस्पताल में जूस पीकर किया पारण,
जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात के बाद सोनम वांगचुक ने तोड़ा अनशन, अस्पताल में जूस पीकर किया पारण,
लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक ने लंबे समय से जारी अपने अनशन को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात के बाद समाप्त कर दिया। अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक ने मंत्रियों की मौजूदगी में पेय पदार्थ ग्रहण कर अपना अनशन तोड़ा। इस दौरान अस्पताल का माहौल भावुक नजर आया, जहां मौजूद लोगों ने उनके स्वास्थ्य की कामना की और उन्हें जल्द स्वस्थ होने की शुभकामनाएं दीं।बताया जा रहा है कि सोनम वांगचुक पिछले 28 जून से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अनशन पर बैठे थे। उनका कहना था कि लद्दाख के पर्यावरण संरक्षण, संवैधानिक अधिकारों और क्षेत्र के विकास से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार को गंभीरता से कदम उठाने चाहिए। लंबे समय तक चले इस आंदोलन के बाद केंद्र सरकार के साथ हुई बातचीत को सकारात्मक माना जा रहा है। इसके बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त करने का फैसला लिया।अस्पताल से सामने आई तस्वीरों में देखा जा सकता है कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह स्वयं मौजूद रहे और सोनम वांगचुक को पेय पदार्थ देकर उनका अनशन तुड़वाया। यह घटनाक्रम सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संवाद की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। हालांकि, आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई और लिखित आश्वासन मिलने तक वे सरकार के अगले कदमों पर नजर बनाए रखेंगे।फिलहाल सोनम वांगचुक डॉक्टरों की निगरानी में हैं और उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। लंबे समय तक उपवास के कारण चिकित्सक उन्हें धीरे-धीरे सामान्य आहार देने की प्रक्रिया अपना रहे हैं। वहीं, इस घटनाक्रम के बाद लद्दाख समेत देशभर में उनके समर्थकों ने राहत जताई है और उम्मीद व्यक्त की है कि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच आगे भी सकारात्मक संवाद जारी रहेगा।
छात्रों के समर्थन में अन्ना हज़ारे का मौन आंदोलन, सरकार से की न्यायपूर्ण समाधान की अपील,
छात्रों के समर्थन में अन्ना हज़ारे का मौन आंदोलन, सरकार से की न्यायपूर्ण समाधान की अपील,
महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में दो घंटे तक मौन रहकर जताया समर्थन, पहले भी प्रधानमंत्री को लिख चुके हैं पत्र।सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे ने छात्रों के समर्थन में महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में दो घंटे का मौन आंदोलन कर अपनी एकजुटता और चिंता व्यक्त की। उन्होंने बिना किसी भाषण या नारेबाज़ी के शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराया और यह संदेश दिया कि लोकतंत्र में युवाओं की आवाज़ को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। सफेद गांधी टोपी और पारंपरिक वेशभूषा में मौन बैठे अन्ना हज़ारे का यह प्रतीकात्मक आंदोलन देशभर में चर्चा का विषय बन गया। बड़ी संख्या में समर्थक भी इस दौरान उनके साथ मौजूद रहे और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए।अन्ना हज़ारे ने कहा कि छात्रों की मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार किया जाना चाहिए और सरकार को जल्द से जल्द ऐसा समाधान निकालना चाहिए जिससे युवाओं का भविष्य सुरक्षित रहे। उनका मानना है कि संवाद और लोकतांत्रिक तरीके से हर विवाद का समाधान संभव है। इससे पहले भी उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर छात्रों से जुड़े मुद्दों पर हस्तक्षेप करने और न्यायपूर्ण कार्रवाई की मांग की थी। उनका यह मौन आंदोलन सरकार और प्रशासन तक छात्रों की आवाज़ पहुँचाने का एक शांतिपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।अन्ना हज़ारे लंबे समय से जनहित, पारदर्शिता और सामाजिक सरोकारों से जुड़े आंदोलनों का नेतृत्व करते रहे हैं। ऐसे में छात्रों के समर्थन में उनका यह कदम केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि युवाओं के अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का भी प्रतीक माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है और छात्रों की मांगों पर आगे क्या निर्णय लिया जाता है।