पेट्रोल में एथनोल मिलाने पर सरकार की सफाई |

पेट्रोल में एथेनॉल (E20) मिश्रण को लेकर सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर उठ रहे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने विस्तृत सफाई जारी की है। सरकार का कहना है कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर कई भ्रामक दावे किए जा रहे हैं, जिनका तथ्यों से कोई संबंध नहीं है। सरकार के अनुसार, एक लीटर एथेनॉल बनाने में 10,000 लीटर पानी खर्च होने का दावा गलत है। एथेनॉल उत्पादन संयंत्रों में प्रति लीटर उत्पादन के लिए लगभग 3 से 5 लीटर प्रोसेस्ड पानी का उपयोग होता है और कई आधुनिक प्लांट ‘ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD)’ तकनीक अपनाकर पानी का दोबारा उपयोग करते हैं।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि E20 कोई नया प्रयोग नहीं है। अमेरिका, ब्राज़ील, कनाडा, जापान, थाईलैंड समेत कई देशों में वर्षों से एथेनॉल मिश्रित ईंधन का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकार के मुताबिक, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) और अन्य संस्थानों के परीक्षणों में E20 से इंजन की कार्यक्षमता या वाहन के प्रदर्शन पर कोई बड़ा नकारात्मक प्रभाव नहीं पाया गया है। हालांकि, कुछ पुराने मॉडलों में कुछ पार्ट्स बदलने की आवश्यकता हो सकती है।
सरकार ने यह भी कहा कि E20 से वाहनों की वारंटी और बीमा पर कोई असर नहीं पड़ेगा, यदि वाहन E20 के लिए अनुमोदित या डिज़ाइन किए गए हैं। साथ ही, ईंधन ग्रेड एथेनॉल में चीनी नहीं होती और उसमें डिनेचरेंट मिलाए जाते हैं, इसलिए चींटियों या मधुमक्खियों के आकर्षित होने जैसी बातें भी भ्रामक बताई गई हैं। अदालत में चल रही सुनवाई को लेकर भी सरकार ने स्पष्ट किया कि मामला E20 कार्यक्रम की वैधता का नहीं, बल्कि एथेनॉल खरीद से जुड़े कुछ अनुबंधों का है। सरकार का कहना है कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों की आय बढ़ाना, प्रदूषण में कमी लाना और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना है। इसलिए लोगों से अपील की गई है कि वे अपुष्ट दावों के बजाय आधिकारिक और प्रमाणित जानकारी पर भरोसा करें।




